महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कई जिलों में कार्रवाई के दौरान 48 लाख रुपये मूल्य के एक्सपायरी खाद्य पदार्थ जब्त किए हैं। इस मामले में पुलिस ने रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल, ब्लिंकिट और जोमैटो के स्वामित्व वाली कंपनी हाइपरप्योर के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
ठाणे के शांतिनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल, ब्लिंकिट और जोमैटो हाइपरप्योर से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों सहित 10 लोगों को नामजद किया गया है। इनमें खाद्य पदार्थों के निस्तारण का काम करने वाली एजेंसियों के संचालक और स्थानीय आपूर्तिकर्ता भी शामिल हैं।
मामले में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
FIR में नामजद लोगों में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक वी. सुब्रमण्यम और इसी कंपनी से जुड़े अशोक कुमार सिंह शामिल हैं। इनके अलावा रिलायंस रिटेल लिमिटेड के नामित प्रतिनिधि विजय भिकाजी खरमाले और वेयरहाउस मैनेजर नीलेश रामदासराव देशमुख के नाम भी शामिल हैं।
अन्य आरोपियों में ब्लिंकिट कॉमर्स के निदेशक अरबिंदर सिंह धिंसा और दीपक सिंह, जोमैटो हाइपरप्योर के आबिद शेख, बीके डिस्पोज के बाबर मियां अहमद सिद्दीकी, भिवंडी के चाविंद्रा क्षेत्र के आपूर्तिकर्ता गुलजार अब्दुल खान और भिवंडी स्थित डिस्काउंट स्टोर के अब्दुल मोबिन खान शामिल हैं।
FDA के सूत्रों के मुताबिक 14 और 15 अक्टूबर को ठाणे और पुणे जिलों में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई।
कार्रवाई के दौरान भिवंडी स्थित एक निस्तारण केंद्र से 24 लाख रुपये से अधिक मूल्य के खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। वहीं, वडपे स्थित रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के गोदाम से लगभग 4.92 लाख रुपये और उसाटणे स्थित जोमैटो हाइपरप्योर की इकाई से करीब 7.81 लाख रुपये के उत्पाद बरामद किए गए।
जब्त किए गए खाद्य पदार्थों का कुल मूल्य 48,09,924 रुपये आंका गया है।
FDA की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि नष्ट किए जाने वाले एक्सपायरी, क्षतिग्रस्त और ग्राहकों द्वारा लौटाए गए खाद्य उत्पादों को कथित तौर पर निस्तारण एजेंसियों, बिना लाइसेंस वाले छंटाई केंद्रों और बिचौलियों के जरिए दोबारा बिक्री के लिए भेजा जा रहा था। बाद में इन उत्पादों को खुदरा दुकानदारों तक पहुंचाया जाता था, जहां इन्हें उपभोक्ताओं को बेचने की आशंका है।
जांच में यह भी सामने आया कि निस्तारण एजेंसियां कथित तौर पर बिना यह सुनिश्चित किए प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज जारी कर रही थीं कि संबंधित खाद्य उत्पादों को वास्तव में नष्ट किया गया है।
FDA अधिकारियों को निस्तारण संबंधी रिकॉर्ड में भी कई विसंगतियां मिलीं। इनमें उत्पादों की मात्रा का मेल न खाना और माल भेजने वाले तथा प्राप्त करने वाले पक्षों के विवरण में गड़बड़ी शामिल है।
सूत्रों के अनुसार, खाद्य उत्पादों को भिवंडी के बिना लाइसेंस वाले केंद्रों पर छांटा जाता था। वहां ऐसे पैकेट अलग कर लिए जाते थे जो देखने में बिक्री योग्य लगते थे। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर बिचौलियों और आपूर्तिकर्ताओं को बेच दिया जाता था।
बाद में भिवंडी के गुलजार नगर स्थित एक खुदरा दुकान में एक्सपायरी और रिसाव वाले खाद्य उत्पाद बिक्री के लिए रखे मिले। यह दुकान बिना लाइसेंस और खरीद के बिलों के संचालित की जा रही थी।
FDA ने ठाणे और पुणे जिलों में समन्वित जांच के लिए सहायक आयुक्तों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की सात टीमें गठित की थीं। इन टीमों ने खाद्य उत्पादों की सूची तैयार कर उन्हें जब्त किया, नमूने एकत्र किए और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। साथ ही, जब्त किए गए उत्पादों की आवाजाही, बिक्री और नष्ट करने पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए।
एक अधिकारी के मुताबिक, 15 अक्टूबर को सुनवाई के बाद पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए, जबकि बिना लाइसेंस वाले चार परिसरों में कारोबारी गतिविधियां बंद करा दी गईं।
